विद्या विनयेन शोभते ! STUDENT POWER NATION POWER

Wednesday, April 15, 2015

अभाविप छात्र नेता



वह लड़ता है ,वह पढ़ता है ,वह सभी का मित्र है ,वह सभी के दुःख का साथी । उसका स्वार्थ शुन्य है । उसके आते ही सभी में एक उत्साह का वातावरण छा जा जाता है ,उसके साथ बात कर सभी स्वयं का दुःख भूला देते है। दुःख की फरियाद सुनता है ,वह सुख का पहला अभिनन्दन करता है । उसके तिजोरी में मित्रो के रहस्य होते है ,लेकिन उसकी चाबी वह कभी किसी को नहीं देता ।महाविद्यालय में सभी उसके जैसा जीवन जीना चाहते है। वह सबके दिलो दिमाग पर छाया रहता है। प्रद्यापक ,संचालक ,कर्मचारी और विद्यार्थी सभी उसे जानते है, उसकी तरह एक उत्सुकता की नजरो से देखा जाता है।वह महाविद्यालय का नेता है , एक आदर्श छात्र नेता।


विद्यार्थी परिषद के कार्य के मूल में ऐसे छात्र नेताओं का निर्माण है जो सर्वसाधारण रूप से महाविद्यालय कैंपस पर रहते है ,सभी क्रिया कलाप उनके अन्य विद्यार्थियों जैसे हो होते है। परन्तु मर्यादा ,देशभक्ति और कार्यप्रणीता से वह हमेशा चर्चित रहते है।महाविद्यालय में तरुण जब इस छात्र नेता को देखते है , तो उसे यह प्रतीत होता है की यदि वह यह सब कर सकता है तो मै भी कर सकता हु । आज आदर्श हमसे दूर जा रहे है ,उन्हें दीवारो से उतार कर जीवन में अगर लाना है तो हमे ऐसे आदर्श स्वयं में बनाने होंगे ताकि सर्व सामान्य विद्यार्थी जो हमारे आस पास है प्रेरित हो सके ।


नुष्य का स्वाभाव देख कर सीखने का होता है । वह अपने आस पास के लोगो का निरिक्षण करता है और उनसे प्रेरणा लेता है।विद्यार्थी परिषद छात्रों में उच्च चरित्र निर्माण हेतु इसी प्रमेय का उपयोग करती है। वह ऐसे दीपक जलाती है जो एक एक करके दूसरे दीपक जलाते है। सभी दीपको का सामूहिक प्रकाश बढ़ता जाता है और अँधेरा मिटता जाता है। यह दीपक एक छात्र नेता होता है ।


स्वयं पर होने वाले अन्याय को वह सहता है, अपमान को नीलकंठ बन पिता है, अपने अंदर एक ज्वालामुखी सतत पालता है। लेकिन कभी आवेश में आकर स्वयं को प्रदर्शित करने हेतु वह विस्फोट नहीं करता। वह वह अविरत कार्य में लगा रहता है।लेकिन जब कभी पीड़ा किसी अन्य को पहुचती है ,वह फिर सत्य का शंखनाद करता है।

वह कम में जीता है ,इसलिए दम में जीता है। उसकी जरूरते सिमित होती है ,ताकि वह दुसरो की जरुरतो पर ध्यान दे सके। उसकी अपनी कोई महत्वाकांक्षा नहीं होती, वह शेष की महत्वाकांक्षा का दोहन करता है, ताकि वह लोग कभी न कभी उसके परे देख ध्येय के लिए अग्रसर हो। उसे यह ज्ञान होता है की महत्वाकांक्षाओं की प्राथमिक पूर्ति कर व्यक्ति को कार्यशील बनाया जा सकता है और अनुभव उसे ध्येयशील। वह स्वयं के ध्येय हेतु व्याकुल रहता है। 
 
वह कभी विचारधारा को किसी पर लादता नहीं। वह यह समझता है की भारत की विविधता केवल भौगोलिक ,आर्थिक एवं सामाजिक ही नहीं बल्कि वैचारिक भी है। वह यह समझता है की सभी विचार अन्तः विश्व कल्याण हेतु है, उनमे संघर्ष मिथ्या है। वह किसी को उसकी विचार विशेष के लिए कभी आलोचित नहीं करता, अपितु उसके विकास के लिए जो आवश्यक वातावरण चाहिए ,उसे प्रदान करता है । वह सभी को यथा स्वरुप में स्वीकार करता है । उसके इसी शैली की वजह से वह विरोधियो में भी सम्मानित होता है।

वह कभी विचलित नहीं होता। परिस्तिथियाँ कितनी ही निराशाजनक क्यों न हो ,वह सदैव कर्मप्रणीत रहता है। कभी धैर्य और धीरज नहीं छोड़ता।बाहर कितनी ही अराजकता क्यों न हो ,वह अपना मन और मस्तिष्का शांत रखता है। कभी आवेश में कार्य नहीं करता।अपनी इसी स्वभाव के कारण वह सभी कार्य समय के भीतर और गुणवक्ता के साथ पूर्ण करता है ।वह विचारधारा को इतनी सरलत से रखता है ,जैसे विषय वास्तु नहीं बल्कि वही बता रहा है जो हमे सभी बाटे है । अंतर मात्र उसके शैली का होता है।वह विचारधारा को जटिल शब्दों में न बंद कर , सरलता से ,पुरे व्यहारिकता और जोशपूर्ण रीती से बताता है ।वह शब्दमाला का इतना धनी होता है। वह जो भी कहता है ,करता है वह इतना सरल और व्यवहारिक होता है की सभी बौद्धिक क्षमता के मनुष्य उसे समझ पते है । 

वह स्वयं को पूर्णतः विद्यार्थी परिषद से कार्य से परिभाषित कर चूका होता है । वह जो भी कार्य करता है ,उसमे परिषद की प्रेरणा निहित होती है । वह हमेशा यह ध्यान रखता है की जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में वह वैसा ही व्यवहार करे जैसा की एक कार्यकर्ता के रूप में वह परिषद में करता है । एक बार विचारधरा में डूबने के बाद, फिर उसे जीवन के अनन्य कार्य अलग अलग नहीं, एक से प्रतीत होते है ।उसे परिषद का कार्य करने हेतु फिर कभी दुविधा नहीं होती क्यों की वह जनता है की जब जब वह कार्य कर रहा होता है, परिषद की पुण्याई में उसका योगदान हो रहा होता है।


वह नियमो को बदलने हेतु आवेशित नहीं होता। नियम मात्र मानसिकता के प्रतिक होते है । वह मानसिकता के बदलने का इंतजार करता है और उसके लिए कार्य करता है।उसका अंतिम उद्देश्य नियम नहीं व्यक्ति का विकास होता है। वह यह जनता है की मानसिकता के बदलते ही नियम अपने आप बदलते है। 
 
उसके राष्ट्र प्रेम की परिभाषा व्यक्ति व्यक्ति से जोड़ कर होती है। वह राष्ट्र प्रेम इसलिए करता है क्यों की वह राष्ट्र के प्रत्येक व्यक्ति से प्रेम करता है। वह व्यक्ति को राष्ट्र से जोड़ कर देखता है और फिर वैसा ही वर्तन सभी लोगो के साथ करता है जैस कि वह राष्ट्र हेतु अपेक्षित करता है।

वह बोलता कम सुनता ज्यादा है। आज समाज में बहुत शोर है, हर कोई अपनी धून ही गाना चाहता है। इस शोर के बीच, हमारा नेता उन आवाजो सुनता है जिसे सुनने के लिए अंतर्मुखी होना पड़ता है।वह आवाजे जिनकी अवहेलना कर दी गयी होती है ,वह जिन्हे दुनिया व्यर्थ समझती है क्यों वह उनके लाभ की विषय वस्तु नहीं। मनुष्य की प्रत्येक समस्या सुलझाई जा सकती है यदि उसे ठीक सेसमझा जाये।हमारा छात्र छात्र नेता संवाद कला का पंडित होता है। उसके लिए संवाद दुसरो पर प्रभाव डालने का साधन अपितु दुसरो को समझने की साधना होती है। 

 
प्रति कठोर और शेष हेतु नम्रा होता है । किसी परिस्तिथि में वह अपने आदर्शो को नहीं तोड़ता ,लेकिन अन्य हेतु वह धैर्य धीरज रखता है ।" मै करता हु ,इसलिए तुम भी करो " वह वह कभी नहीं सोचता । विचारधारा सिखाने महत्वाकांक्षा कभी कार्यकर्ता केजरुरतो और कमियों की अवहेलना नहीं करता ।वह इन्जार करता है और कर्म करता रहता है ।वह मयवि होता है ,संसार के आकर्षणों के साथ खेलता है ,ताकि उन आकर्षणों में बाधित लोगो के पास जा सके ,लेकिन वह कभी उनके मोह में फंस कर अपना ध्येय नहीं भूलता ।वह अंदर से हर और बाहर से हरी होता है।


अन्तः अपना अधिकतर समय राष्ट्र कार्य में बीतता है परन्तु, यह उसके लिए कोई वजह नहीं होती की वह अपने दोस्तों,परिवार अथवा अन्य जानो से दूर रहे अथवा अध्ययन पर दुर्लक्ष हो । उसका जीवन सर्व संतुलित होता है। उसके जीवन में समन्वय का मंत्र सिख लिया होता है । वह जिस पल जो भी करता है ,बस उसी में राम जाता है।एक विद्यार्थी होने ने नाते ,वह हमेशा अपने अध्ययन कार्य हेतु सजग रहता है ।वह पढ़ाई के साथ लड़ाई करता है। उसका प्रत्येक कृत्या एक प्रेरणा होती है,जो उसके अध्ययन कार्य भी निहित होता है।


समाज को कुछ ऐसे लोगो की आवश्कता है,जो उन बीजो की तरह हो जो धरती के छाती को चीर अंदर तक जाते है,फिर अपने अस्तित्व को समाप्त कर एक ऐसे वृछ का निर्माण करते है जो सहत्र कालों तक समाज को सेवा रूपी फल देता रहे ! विद्यार्थी परिषद एक ऐसा ही वृछ है और विद्यार्थी परिषद के छात्र नेता काल के बीज । 

 
हमने एक ऐसे स्वर्णिम भारत के निर्माण कार्य में जुटे हुए है ,जहाँ का विद्यार्थी संकीर्णता से पर हो विचार करता हो, भौतिकता से दूर आध्यात्मिकता की तलाश में हो। जो जात पात रंग भाषा और दलगत राजनीती से ऊपर, स्वधर्म के स्वाभिमान से साथ राष्ट्र हेतु निरंतर कार्यरत हो।ऐसे छात्र नेता जो अपनी स्नेह की ऊर्जा से पत्थरों को पिघलने का दम भरते हो ,इस साध्य की साधना  के महान साधक है ।ऐसे विद्यार्थी जो अपने जीवन को एक सन्देश बना दुसरो को भी एक आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा दे और भारत माता को जगत गुरु बनाने हेतु अविरत प्रयतशील रहे | यह वरदान हम लेकर रहेंगे, और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इस कार्य हेतु हमारी तपस्या है ।
प्रकाशक 
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद 
महाराष्ट्र

ज्ञानमंथन-2015

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद,Dr.BATU,Lonere तर्फे आयोजित करण्यात आलेल्या  ""ज्ञानमंथन-2015"" हा कार्यक्रम नुकताच पार पडला. या कार्यक्रमाला वक्ते म्हणून  पद्मश्री श्री मिलिंद कांबले सर, Dr.BATU,Lonere चे प्रभारी कुलगुरु मा. वासुदेव गाड़े सर, प्राध्यापक विजय नवले सर(प्रसिद्ध करिअर मार्गदर्शक) आणि प्राध्यापक वरदराज बापट सर(अभाविप महाराष्ट्र, प्रदेश्याध्यक्ष) यांचे मार्गदर्शन लाभले. या कार्यक्रमाला विद्यार्थ्यांचा उत्स्फूर्त प्रतिसाद पहायला मिळाला. 659 विद्यार्थ्यानी कार्यक्रमाला उपस्थिति दर्शवली. त्यामध्य विध्यार्थी 389, विद्यार्थिनी 255 आणि प्राध्यापक संख्या 15 होती. Dr.BATU,lonere चे सर्व विभाग प्रमुख व सर्व प्राध्यापक या कार्यक्रमाला उपस्थित होते.


Saturday, April 11, 2015

नारी है तो दुनिया सारी है

स्वयं दुर्गा स्वयं में कभी भवानी  है,
तू गौरी ,तू गंगा तू ही माँ काली है,
शक्ति का स्वरुप स्वयं नारी  है,
नारी है तो दुनिया सारी है । धृ ।



माया की जननी तू है   ,तू ही माया हारिणी है,
माता ,भगिनी, मित्र ,तो कभी संगिनी,
तेरे रूप अनेक है नारी परन्तु ,
सभी रूप में कल्याणकारी है ,
नारी है तो दुनिया सारी  है ।१ ।




तू प्रकृति का सत्य  है ,
तुझ से सत्य है परिभाषित,
तू प्रेरणा कभी सत्य कर्मो की ,
जीवन का सत्यापन स्वयं नारी है ,
नारी है तो दुनिया सारी  है ।२।





तू जब चाहे सूर्य थम जाये ,
अज्ञानी अंधियारो, ज्ञान के दीप जलाये ,
समय आने पर स्वयं शास्त्र उढाये ,
तू सती  ,तू सावित्री ,झांसी की रानी है ,
नारी है तो दुनिया सारी है । ३।


तू कोमलता का प्रतिक ,
हौसले चट्टानों की तरह अडिग ,
फूल भी है चिंगारी है ,
यह भारत की नारी है ,
नारी है तो दुनिया सारी है । ४ ।
                    

पायो के घुंगरू अब टूटेंगे ,
घर की चौकठ से भी अस्त्र  चलेंगे ,
एक निवेदिता ,एक मीरा, एक चेन्नमा हुई ,
हर नारी अब दुर्गा बने ,
विद्यार्थी परिषद की तैयारी है ,
नारी है तो दुनिया सारी है । ५ ।


           प्रकाशक 
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद
         प्रतिभा संगम

Wednesday, April 8, 2015

कार्यकर्ता के मन की बात : D.Y Patil Protest

अजिंक्य डी.वाय.पाटील महाविद्यालय भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन एक प्रेरणादायी अनुभव .......... नुकतेच अजिंक्य डी.वाय.पाटील महाविद्यालयाच्या भ्रष्टाचाराबाबत आंदोलन करण्यात आले.दिनांक २४ तारखेला आंदोलन ठेवण्यात आले होते त्यानुसार आम्ही काही कार्यकर्ते त्या ठिकाणी गेलो परंतु महाविद्यालयाकडून गुंडांकडून सर्व कार्यकर्त्यांना मारहाण करण्यात आली.त्यात आनंदजी पुरोहित,केदारजी देशपांडे,प्रणावजी गुरव,ह्यांना तर अक्षरशा जखमी होण्यापर्यंत म्रहण झाली. त्यानंतर मात्र ज्या ठिकाणी कार्यकर्त्यांना मारहाण झाली त्याच ठिकाणी कार्यकर्ता अभिमानाने उभा राहिला पाहिजे कार्यकर्त्याला सन्मान मिळालाच पाहिजे अशी सर्व अ.भा.वि.प. च्या वरिष्ठ कार्यकर्त्यांची भूमिका महत्वाची वाटते.

त्याचे कारण बाकीच्या ठिकाणी असे घडताना दिसत नाही कार्याकात्याचा वापर करून संघटना मोठी करणारे अनेक दिसतात पण कार्यकर्त्यांना सन्मान देणारी अ.भा.वि.प. म्हणजे Student Organiztion with Different माझ्या मित्रांनो आपणास कदाचित हि गोष्ट शुल्लक वाटत असेल परंतु एक कार्यकर्ता म्हणून मला हि बाब महत्वाची वाटते कारण कोणत्याही संघटनेचा कार्यकर्ता हा पाया असतो आणि तो जर टिकला तर त्या संघटनेस मोठ स्वरूप मिळण्यास कोणीच रोखू शकत नाही कदाचित हे एक कारण असू शकते कि आज अ.भा.वि.प. जगातील सर्वात मोठी विध्यार्थी संघटना आहे आणि मला ह्या संघटनेचा कार्यकर्ता असण्याचा अभिमान ह्या घटनेनंतर वाढीस पावला आहे. व एक कार्यकर्ता म्हणून ह्या भुमिके मुळे पुढील कामास हा अनुभव प्रेरणा देणारा ठरला असेच म्हणावे लागेल, 

परिमल देशपांडे
ABVP Pune 

विद्यार्थी परिषद : उद्देश्य और कार्य

 अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् में सदस्य के रूप में  आपको सम्मिलित करते हुआ हमे असीम प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है . अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (संक्षिप्त-एबीवीपी या विद्यार्थी परिषद) विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन हैं। इसकी स्थापना छात्र हित और छात्रों को उचित दिशा देने के लिए किया गया. विद्यार्थी परिषद का नारा है - ज्ञान, शील और एकता । अपने विविद रचनातम कार्यो , छात्र आंदोलनों एवं छात्रों की समस्यों का समद्हम करते  हुआ अभविप की एक जिम्मेदार छवि समाज में बनी है .


स्थापना


अखिल भारतीय विद्यार्थी की स्थापना मुंबई में ९ जुलाई, १९४९ को हुई थी।

उद्देश्य


अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की स्थापना का मूल उद्देश्य राष्ट्रीय पुनर्निर्माण है। विद्यार्थी परिषद के अनुसार, छात्रशक्ति ही राष्ट्रशक्ति होती है। राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के लिए छात्रों में राष्ट्रवादी चिंतन को जगाना ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का मूल उद्देश्य है। देश की युवा छात्र शक्ति का यह प्रतिनिधि संगठन है। इसकी मूल अवधारणा राष्ट्रीय पुनर्निर्माण है। इसका नारा है - छात्र शक्ति-राष्ट्रशक्ति । वैसे एवीवीपी का आधिकारिक स्लोगन - ज्ञान, शील, एकता - परिषद् की विशेषता है।

संगठन

राष्ट्रवादी छात्रों के इस संगठन की हर वर्ष देशव्यापी सदस्यता होती है। देश के सभी विश्वविद्यालयों और अधिकांश कॉलेजों में परिषद की इकाईयां हैं। अधिकांश छात्रसंघों पर परिषद का ही अधिकार है। संगठन का मानना है कि आज का छात्र कल का नागरिक है। हर वर्ष होने वाले प्रांतीय और राष्ट्रीय अधिवेशनों के द्वारा नई कार्यसमिति गठित होती हैं और वर्ष भर के कार्यक्रमों की धोषणा होती है। यह एकमात्र संगठन है जो शैक्षणिक परिवार की अवधारणा में विश्वास रखता है। और इसी कारण परिषद के अध्यक्ष पद पर प्रोफेसर हीं चुने जाते हैं। इसकी चार स्तरीय इकाईयां होती है। पहली कॉलेज इकाई, दूसरी नगर इकाई, तीसरी प्रांत इकाई और चौथी राष्ट्रीय इकाई। अब कई स्थानों पर जिला इकाई भी बनने लगी 

कार्य

स्थापना काल से हीं संगठन ने छात्र हित और राष्ट्र हित से जुड़े प्रश्नों को प्रमुखता से उठाया है और देश व्यापी आंदोलनों का नेतृत्व किया है। आज इस संगठन से जुड़े रहे लोग समाज-जीवन के हर क्षेत्र में सक्रिय हैं और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। बांग्लादेशी अवैध घुसपैठ और कश्मीर से धारा ३७० को हटाने के लिए विद्यार्थी परिषद समय-समय पर आदोलन चलाते रहा है। बांग्ला देश को तीन बीघा भूमि देने के विरुद्ध परिषद ने ऐतिहासिक सत्याग्रह किया था। विद्यार्थी परिषद् देशभर के अनेक राज्यों में प्रकल्प चलाती है.बिहार में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नाम सबसे ज्यादा रक्तदान करने का रिकॉर्ड है.इसके अलावा वैसे निर्धन मेधावी छात्र, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिय़े निजी कोचिंग संस्थानों में नहीं जा सकते...उनके लिये स्वामी विवेकानंद निशुल्क शिक्षा शिविर का आयोजन किया जाता है..राष्ट्रीय स्तर पर संगठन की ओर से हरेक साल Student Exchange For Inter-state लिविंग ( अंतरराज्य छात्र जीवन दर्शन )  का आयोजन किया जाता है.. जिसके तहत दूसरे राज्य में रहने वाले छात्र अन्य राज्यों में प्रवास करते हैं..और वहां की संस्कृति और रहन-सहन से परिचित होते हैं.

अतः हम आपसे यह निवेदन करते है की आप भी राष्ट्र पुनर्निर्माण के इस कार्य में अ भ वि प की सयता करे . परिषद् के कार्यो में सक्रिय रूप से सहभाग ले .आपके महाविद्यालय में अ भ वि प की कॉलेज  इकाई घोषित कर कार्य सुरु करे , इसके लिए अ भ वि प के कर्यकर्त्यो  से संपर्क करे अथवा सदस्यता रशीद पर दिए नंबर पर फोन करे . आप सहयोग माँ भारती के चरणों में समपर्पित होगा .



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